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बसपा नहीं देगी किसी भी सूरत में सपा का साथ, ये है वजह

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लखनऊ । कहा जा रहा था कि प्रदेश में कमल खिल जाने और भाजपा की सरकार बनजाने के बाद अपने आप में धुर विरोधी राजनीतिक पार्टियां भारतीय जनता पार्टी को राज्‍य में हो रहे दो सीटों के संसदीय उपचुनाव में हराने के लिए लोकतंत्र खतरे में है और सेक्‍युलरवाद के चलते एक साथ आ रही हैं लेकिन अब इस मामले में स्‍थ‍िति पूरी तरह से स्‍पष्‍ट हो गई है। ये दोनों ही पार्टियां उत्‍तरप्रदेश में किसी भी सूरत में साथ नहीं आनेवाली है। क्‍योंकि अब उत्तर प्रदेश की गोरखपुर और फूलपुर संसदीय सीट के उपचुनाव में समाजवादी पार्टी (सपा) के उम्मीदवारों को समर्थन देने की अटकलों को बहुजन समाज पार्टी (बसपा) ने सिरे से खारिज कर दिया है।

इस संबंध में परेश मिश्रा जोकि बहुजन समाज वादी की मीडिया सेल देख रहे हैं ने बताया कि कि अभी ऐसा कोई निर्णय नहीं लिया गया है। यह सही है कि पार्टी की बैठकें हुई हैं, लेकिन उसमें इस तरह का निर्णय नहीं लिया गया है। उन्‍होंने कहा कि इस बारे में अंतिम निर्णय बसपा सुप्रिमों बहनजी मयावती को लेना है।

असल में इस प्रकार का मैसेज इसलिए भी लोगों तक गया क्‍यों कि बसपा अमूमन उपचुनावों से अपने को दूर रखती रही है दूसरी ओर कई लोगों का कहना है कि यदि यह दोनों दल साथ आए तभी भाजपा की बढ़ती ताकत और मोदी-शाह की सोशल इंजीनियरिंग को उत्‍तरप्रदेश में रोका जा सकता है ।

बतादें कि राज्‍य में पिछड़े, दलित और मुसलमानों की आबादी करीब 70 फीसदी है। यहां वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव में बसपा को एक भी सीट नहीं हासिल हुई थी, जबकि सपा मात्र पांच सीट जीत सकी थी। वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव में सपा केवल 47 सीटों पर जीती थी जबकि बसपा 19 सीटों पर ही सिमट गयी थी। यहां लोकसभा की 80 सीटें आती हैं।

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