Home संपादकीय Be professional in bureaucracy or appoint professional bureaucrat: नौकरशाही में प्रोफेशनल बनें या प्रोफेशनल नौकरशाह नियुक्त हों

Be professional in bureaucracy or appoint professional bureaucrat: नौकरशाही में प्रोफेशनल बनें या प्रोफेशनल नौकरशाह नियुक्त हों

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सरकार के स्तर पर कुछ फैसले ऐसे होते हैं जो होते तो काफी महत्वपूर्ण हैं, लेकिन इन फैसलों पर चर्चा काफी कम होती है। पर इन फैसलों पर न केवल चर्चा, बल्कि गंभीर मंथन भी करना होता है, क्योंकि ये फैसले हमारे नीति नियंताओं से जुड़े होते हैं। ऐसा ही एक बड़ा फैसला 2016 में हुआ, जब केंद्र की मोदी सरकार ने लेटरल-एंट्री के तहत निजी क्षेत्र के प्रोफेशनल्स को केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर संयुक्त सचिव बनाने जैसा फैसला किया था। सीधे शब्दों में कहें तो ये प्रोफेशनल्स बिना यूपीएससी की परीक्षा दिए सीनियर आईएएस रैंक पर भर्ती होंगे। दो दिन पहले इस फैसले ने मुर्त रूप ले लिया है। यूपीएससी ने लेटरल एंट्री के जरिए चुने गए नौ प्रोफेशनल्स के नाम जारी किए हैं। ये अब केंद्र सरकार में संयुक्त सचिव स्तर के महत्वपूर्ण पद पर नियुक्त किए जाएंगे। सरकार इनके अनुभवों को अपनी कार्यप्रणाली में शामिल करेगी और प्रशासनिक तंत्र की संचरना को और अधिक प्रोफेशनल बनाने पर मेहनत की जाएगी।
केंद्र सरकार का यह फैसला एक माइन स्टोन की तरह है। भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में शायद यह पहला मौका होगा जब इतने सारे प्रोफेशनल्स की सरकारी विभागों के अतिमहत्वपूर्ण पदों पर तैनाती होगी। इनमें से सभी प्रोफेशनल्स निजी क्षेत्रों के बड़े नाम हैं। यह नियुक्ति इसलिए भी बेहद खास है क्योंकि अब तक इतने ऊंचे पदों पर सिर्फ उन अधिकारियों की ही नियुक्ति होती थी जो संघ लोक सेवा आयोग द्वारा आयोजित सीविल सर्विसेज परीक्षा के विभिन्न चरणों को पार कर पाते थे। उसके बाद इस पद तक पहुंचने के लिए उनका अनुभव भी बहुत जरूरी होता था। पर ये प्रोफेशनल्स सीधे उन पदों तक पहुंचकर अपनी सेवा देंगे। इनकी नियुक्ति में निश्चित तौर पर पारदर्शिता रखी गई है, जिसके लिए केंद्र सरकार बधाई की पात्र है। इन सभी की नियुक्ति यूपीएसएसी बोर्ड के कठिन इंटरव्यू के कई दौर के बाद हुई है। इनको कृषि, सिविल एविएशन, फाइनेंस, ट्रांसपोर्ट और शिपिंग जैसे विभागों में तैनाती दी जाएगी। बताना जरूरी है कि ये वो प्रोफेशनल्स हैं जो विभिन्न प्रोफेशनल इंस्टीट्यूट से पास आउट हैं और अपने क्षेत्र में इन्होंने महारत हासिल कर रखी है। सरकार का यह कदम नीति निर्धारण के मामले में एक बड़ा परिवर्तन माना जा रहा है।
आपको यह भी बता दूं कि लेटरल एंट्री के जरिए इससे पहले भी कुछ नियुक्तियां हुई हैं, जिनमें पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, मोंटेक सिंह आहलूवालिया जैसे बड़े नाम शामिल हैं। पर इनकी नियुक्तियों का मोड कुछ अलग था। यह पहली बार है कि यूपीएससी के जरिए इनकी नियुक्ति हुई है। इसके लिए बकायदा नोटिफिकेशन निकाला गया था, फॉर्म भरे गए थे। करीब छह हजार उम्मीदवारों में से ये नौ लोग सफल हो सके हैं। जिनके नामों की घोषणा यूपीएससी की मुख्य परीक्षा के रिजल्ट निकलने के कुछ दिन बाद की गई है। यह एक बड़ा बदलाव है। पर इस बदलाव के साथ मंथन भी जरूरी है कि आखिर केंद्र सरकार को यह कदम क्यों उठाना पड़ा। साथ ही इस बात पर भी मंथन जरूरी है कि क्यों भारतीय स्वतंत्रता के इतने सालों बाद भारत सरकार को निजी क्षेत्र के प्रोफेशनल्स को नौकरशाही की मुख्य धारा में लाने की जरूरत पड़ गई।
नीति आयोग ने भी इस तरह की लेटरल एंट्री की जरूरत बताई थी, लेकिन तमाम विरोधों के कारण इस पर कभी फैसला नहीं हो सका। साल 2005 में भी प्रशासनिक सुधार की एक हाईलेवल रिपोर्ट के बाद कुछ इसी तरह की एंट्री पर विचार हुआ था। फिर 2010 में दूसरी प्रशासनिक सुधार रिपोर्ट में भी इसकी अनुशंसा की गई, लेकिन कभी इस पर आम सहमति नहीं बनी। पर 2016 में मोदी सरकार ने लेटरल एंट्री की संभावना तलाशने के लिए एक कमेटी बनाई। कमेटी की रिपोर्ट के बाद अधिसूचना जारी की गई और अब इस पर नियुक्ति भी हो रही है। यह एक स्वस्थ कदम तो है, लेकिन पर इस बात पर भी मंथन जरूरी है कि क्यों हम बाहर से प्रोफेशनल बुलाएं जब हमारी नौकरशाही में बड़े पैमाने पर हार्ड कोर प्रोफेशनल्स की टीम बैठी है।
हर बार यूपीएसएसी की परीक्षा में टॉप रैंकिंग पाने वालों की जरा प्रोफाइल चेक करिए। आप पाएंगे कि इनमें से आधे से अधिक या तो किसी आईआईटी से पास आउट होंगे, या किसी मेडिकल इंस्टीट्यूट या फिर आईआईएम से पास आउट होंगे। कई ऐसे होंगे जो वर्षों से निजी संस्थानों में हायर रैंक पर नौकरी करने के बाद यूपीएससी में सेलेक्ट हुए होंगे। क्यों नहीं हम इन्हें प्रोफेशनल मानते हैं? सवाल उठता है कि क्यों नहीं इतने वर्षों से इन प्रोफेशनल्स को हमने उन विभागों में तैनाती नहीं दी जिसके ये एक्सपर्ट हैं? इस बात पर भी मंथन जरूरी है कि क्या इन नौ या दस निजी क्षेत्र के एक्सपर्ट की नियुक्ति के बाद भारत का प्रशासनिक ढांचा पूरा प्रोफेशनल हो जाएगा? भारत सरकार में हजारों ऐसे नौकरशाह नियुक्त हैं जो इंडियन इंजीनियरिंग सर्विस, इंडियन इकोनॉमिक सर्विस, इंडियन रेलवे पर्सनल सर्विस, एग्रीकल्चर रिसर्च सर्विस आदि से भी आए हुए हैं। इंडियन इंस्टीट्यूट आॅफ मैनेजमेंट के हजारों प्रोफेशनल्स हमारे सिस्टम में मौजूद हैं। पर क्यों नहीं कभी इस बात पर मंथन किया गया कि किसी इंडियन इंजीनियरिंग सर्विस के युवा को केंद्र सरकार के किसी इंजीनियरिंग विभाग का प्रमुख नियुक्त किया जाए। क्यों नहीं किसी एमबीबीएस युवा को स्वास्थ विभाग का नीति निर्माता बनाए जाए। क्यों नहीं किसी आईआईएम पासआउट युवा को किसी ऐसे विभाग में लगाया जाए जहां उसके टैलेंट का सही उपयोग हो सके।
भारत में ही कई ऐसे प्रोफेशनल इंस्टीट्यूट मौजूद हैं, जिसमें प्रवेश के लिए यूपीएसएसी द्वारा आयोजित कठिन परीक्षा और इंटरव्यू के कड़े दौर से गुजरना पड़ता है। उन इंस्टीट्यूट में शिक्षा का स्तर इतना प्रोफेशनल है कि वहां से पासआउट युवा देश के विभिन्न संस्थानों के सर्वोच्य पद पर पहुंचे हैं। और वहीं के बच्चे संघ लोक सेवा आयोग की परीक्षा पास कर आईएस, आईपीएस बनते हैं। मंथन की जरूरत है क्यों नहीं भारत सरकार अपने सिस्टम में मौजूद नौकरशाहों की उस लिस्ट पर ध्यान देती है जिनमें हजारों प्रोफेशनल्स मौजूद हैं। क्यों नहीं उनकी नियुक्त उनकी पढ़ाई के अनुसार करने की व्यवस्था की जाती है, ताकि उनके ज्ञान का सही उपयोग हो सके। मंथन का समय है कि एक इतिहास या भूगोल पढ़ने वाला व्यक्ति भारत सरकार के हेल्थ डिपार्टमेंट का मुखिया बनकर अपना बेहतर दे सकता है या फिर एमबीबीएस किया हुआ व्यक्ति वहां अपना सौ फीसदी दे सकता है।
अभी हाल ही में एक हिंदी न्यूज चैनल लॉन्च हुआ। नाम है टीवी नाइन भारतवर्ष। एक दिन मैं इसका प्रोमो देख रहा था बड़ा ही सुखद अनुभव हुआ कि एंकर्स की टीम में कुछ ऐसे चेहरे भी हैं जो पूर्व में भारतीय सेना की मुख्यधारा में शामिल थे। निश्चित तौर पर इन डिफेंस प्रोफेशनल्स का उपयोग चैनल उनकी उपयोगिता के अनुसार करेगा। खासकर डिफेंस रिर्पोटिंग में, क्योंकि अक्सर ऐसा देखने को मिलता है कि डिफेंस रिर्पोटिंग करते वक्त सामान्य एंकर्स और रिपोर्टर वो गलती कर बैठते हैं जो भारत की सुरक्षा के लिए खतरा पैदा कर देते हैं। तमाम अन्य चैनल्स और अन्य मीडिया संस्थान भी विशेष मौकों पर इस तरह के प्रयोग करते रहे हैं। याद करिए कांग्रेस ने जब अपना घोषणापत्र बनाया तो क्यों एक ऐसे पूर्व सैन्यकर्मी को अपना सलाहकार बनाया जिसने सेना के उच्च पद को हासिल कर रखा है।
कहने का आशय इतना है कि जो व्यक्ति जिस फिल्ड से जुड़ा होता है वह उसमें बेहतर कर सकता है। अपने अनुभवों का उपयोग वह प्रोफशनलिज्म के साथ कर सकता है। मंथन का वक्त है क्यों भारत सरकार बाहर के प्रोफेशनल्स को इतना महत्व दे रही है जबकि अपनी नौकरशाही में एक से बढ़कर एक प्रोफेशनल्स बैठे हैं। लेटरल इंट्री एक बेहतरीन शुरूआत हो सकती है, लेकिन सरकार को इस बात पर भी मंथन जरूर करना चाहिए कि अपने सिस्टम में मौजूद प्रोफेशनल्स का उपयोग कैसे किया जाए। यह बदलाव का वक्त है। अगर यह बदलाव भी सही दिशा में लागू हुआ तो निश्चित तौर पर आने वाले वक्त में भारतीय नौकरशाही की तमाम विसंगतियों को दूर किया जा सकता है। सवाल बड़ा है कि हम नौकरशाही में प्रोफेशनल बनें या प्रोफेशनल नौकरशाह नियुक्त करें।

कुणाल वर्मा

kunal@aajsamaaj.com
(लेखक आज समाज के संपादक हैं)

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