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2020 तक लगभग 9 लाख लोगों की कैंसर से मौत की सम्भावना

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विश्‍व कैंसर दिवस पर विशेष
पटना। देश में तेज़ी से फैल रही कैंसर जैसी घातक बीमारी से वर्ष 2020 तक लगभग 9 लाख लोगों की मौत होने की सम्भावना है। साथ ही इस बीमारी से देश की अर्थव्यवस्था प्रभावित हो रही है और सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी ) भी घटा है।

इंडियन कांउसिल मेडिकल रिसर्च के अनुसार साल 2020 तक 17.3 लाख लोग जानलेवा बीमारी कैंसर के शिकार होंगे जिससे 8.8 लाख लोग अपनी जान गंवा चुके होंगे। ब्रिक्स द्वारा हाल ही में जारी एक सर्वे रिपोर्ट में भी कैंसर जैसी बीमारी से देश की अर्थव्यवस्था प्रतिकूल रूप से प्रभावित होने का खुलासा हुआ है। सर्वे के मुताबिक वर्ष 2012 तक तम्बाकू जनित उत्पादों के सेवन से न केवल देश की अर्थव्यवस्था प्रभावित हुई है बल्कि इससे देश की जीडीपी में भी गिरावट दर्ज की गई है। रिपोर्ट में कहा गया है कि कैंसर के उपचार पर हुए भारी भरकम खर्च की वजह से 2012 में भारत ने कुल कार्यक्षमता में 6.7 बिलियन मानव श्रम की कमी दर्ज की गई। यह कमी देश की आर्थिक विकास दर का 0.36 प्रतिशत है। कैंसर के उपचार पर होने वाले खर्च से बिगड़ रही अर्थव्यवस्था से चिंतित ब्रिक्स देशों ने भी इसकी रोक थाम पर बल दिया है।

सर्वे रिपोर्ट के मुताबिक ब्राजील, रूस, भारत, चीन, साउथ अफ्रीका जैसे पांच ब्रिक्स देशों में विश्व की 40 फीसदी से अधिक जनसंख्या निवास करती है जबकि वैश्विक विकास दर में ये देश 25 प्रतिशत का योगदान कर रहे हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि वर्ष 2012 में कैंसर से संबंधित मौतों के कारण इन पांचों देशों की अर्थव्यवस्था बुरी तरह से प्रभावित हुई है। इन देशों को 46.3 बिलियन डालर का इस अवधि में आर्थिक नुकसान झेलना पड़ा।

वायस ऑफ टोबेको विक्टिम्स (वीओटीवी) के स्टेट पैट्रन एवं नारायणा सुपर स्पेसलिटी के कैंसर रोग विशेषज्ञ डा. सौरव दत्ता ने बताया कि तंबाकू के इस्तेमाल को कम करने के लिए सुप्रीम कोर्ट के आदेश को सख्ती से पालना करना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि तम्बाकू के कारण 90 प्रतिशत मुंह का कैंसर हो रहा है। हेल्थ फांउडेशन के ट्रस्टी संजय सेठ ने कहा कि ग्लोबल एडल्ट टोबेको सर्वे के अनुसार भारत में 26.7 करोड़ लोग तंबाकू का उपयोग करते हैं, जबकि 5500 बच्चे प्रतिदिन तंबाकू उत्पादों का सेवन शुरु कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि ओरल कैंसर जिस तरह से महामारी के रुप में फैल रहा है यदि समय रहते उचित कदम नहीं उठाए गए तो भारत में अगले तीन साल में करीब 9 लाख लोगों की मौत होगी। साथ ही तंबाकू उत्पादों की बिक्री पर पूर्णतया प्रतिबंध नहीं लगा तो इन लाखों लोगों की मौत के अलावा 17 लाख से अधिक लोगों को यह जानलेवा बीमारी जकड़ लेगी। संजय सेठ ने कहा कि इन सबको बचाने के लिए सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय को सख्ती से पालन कराना होगा।उल्लेखनीय है कि 23 सितम्बर 2016 को सुप्रीम कोर्ट ने ट्विन्स पैंक में तम्बाकू जनित पदार्थों, गुटका, जर्दा, पान मसाला, खैनी की बिक्री पर पूर्णतया प्रतिबंध लगा दिया था तथा तंबाकू और निकोटिन युक्त पदार्थों की बिक्री पर प्रतिबंध को पूर्णतया लागू करने का निर्देश दिया था।

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