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डेरा सच्चा सौदा प्रमुख की असल परीक्षा तो अब होगी

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दोषी को दोषी न कहें तो और क्या कहें? और अदालत भी ऐसा न कहे तो यह न्यायपालिका की गरिमा के विपरीत है। इस संसार में कोई किसी को दुख नहीं देता। कोई किसी का दुश्मन नहीं है। व्यक्ति खुद अपना मित्र है और खुद अपना शत्रु। उसके गुणकर्म ही उसके सुख-दुख के हेतु हैं। गोस्वामी तुलसीदास ने लिखा है कि कोउ न काहू सुख-दुख कर दाता। निजकृत कर्म भोग सब ताता। वे यहीं नहीं रुके उन्होंने इससे भी आगे बढ़कर एक बात कही कि करम प्रधान विस्व करि राखा। जो जस किया सो तस फल चाखा। राम रहीम गुरमीत इसके अपवाद नहीं हो सकते। एक दौर था जब उन्हें सुनने के लिए सिरसा स्थित उनके डेरे सच्चा सौदा में भक्तों की भीड़ लगा करती थी और आज वह दिन है जब वे जेल के सींकचों में अपने किए पर आंसू बहा रहे हैं। अपने गुनाहों पर पर्दा डालने के लिए उन्होंने जिस दिन पत्रकार रामचंद्र छत्रपति की हत्या की साजिश रची, बुरे ग्रहों की उसी रोज उनके मस्तक पर सवारी हो गई। बाबा होकर भी वे गलत काम करते रहे और खुद को भगवान बताते रहे। वे यह भूल गए कि धरती पर अगर भगवान भी आता है तो उसे भी धरती के दुख-दर्द झेलने पड़ते हैं। पत्रकार रामचंद्र छत्रपति हत्या मामले में फैसला सुनाते हुए न्यायाधीश जगदीप सिंह ने दो बार कहा कि राम रहीम तुम दोषी हो। यह सुनकर वह उदास हो गया। उदास होना स्वाभाविक है। सालों की अय्याशी एक झटके में अगर कंटकाकीर्ण जिंदगी में तब्दील हो जाए तो दुखी होना स्वाभाविक ही है।
सुरक्षा कारणों से उसे कोर्ट ले जाने की बजाय वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये पेश किया गया। समझा जाता है कि दोषी शब्द गुरमीत राम रहीम एक बार में नहीं सुन पाया। अप्रिय शब्द सहज ही सुनाई नहीं पड़ते। व्यक्ति सुनना भी नहीं चाहता। सुन भी लिया तो वह यह तस्दीक करना चाहता है कि यह उसके कानों की दिक्कत है या जो सुना गया है, वह वाकई सही है। इसके बाद जज जगदीप सिंह ने फिर राम रहीम को बताया कि तुम्हें रामचंद्र छत्रपति की हत्या का दोषी करार दिया जाता है। गुरमीत राम रहीम ने जब यह फैसला सुना, तो उसका चेहरा उतर गया। फैसला सुनाए जाने के बाद जिला शासकीय अधिवक्ता पंकज गर्ग ने अदालत से अपील की कि वह सजा के लिए कम से कम एक सप्ताह का समय दें। सजा को लेकर पुलिस और सरकार की ओर से तैयारी करनी पड़ेगी। इस पर जज ने 17 जनवरी के लिए सजा का समय दिया है। सजा होती है तो कम से कम दस साल के लिए रामरहीम को और जेल यातना सहनी होगी। डेरा सच्चा सौदा का प्रमुख गुरमीत राम रहीम फिल हाल हरियाणा की सुनरिया जेल में बंद है। वीडियो कॉन्फ्रेसिंग के जरिये पेश होने से पहले पूरी तरह से सामान्य दिख रहा था, लेकिन जैसे ही सीबीआई की विशेष अदालत ने फैसला सुनाया तो उसका चेहरा एकदम से उतर गया। माथे पर हाथ रखकर चुपचाप कॉन्फ्रेंसिंग हॉल में बैठ गया। चेहरे पर शिकन लिए बैरक में इधर-उधर टहलता रहा। सजा 17 जनवरी को सुनाई जानी है। इसलिए प्रशासन ने अभी से चाक चौबंद व्यवस्था करनी आरंभ कर दी है। सुनारिया जेल व आसपास के क्षेत्र में सुरक्षा बढ़ा दी गई है। इस निर्णय की जानकारी मिलने पर अंबाला जेल में बंद हनीप्रीत भी बेचैन हो गई। हनीप्रीत उसकी सबसे बड़ी राजदार है। जिसे वह अपनी बेटी कहा करता था। डेरा सच्चा सौदा का समूचा तंत्र हनीप्रीत ही चलाती थी लेकिन वह भी बंद है। बाबा के तीन सहयोगी कुलदीप, कृष्णलाल और निर्मल सिंह भी सेंट्रल जेल में बंद हैं। हनीप्रीत को 13 अक्टूबर 2017 को 22 डेरा प्रेमियों सहित अंबाला जेल में बंद किया गया। डेरा सच्चा सौदा के एक अनुयायी उत्तर प्रदेश के सरसवा के रहने वाले रक्षविंदर गुर्जर ने 3 सितंबर 2017 को सेंट्रल जेल में फांसी लगा ली थी। उसे पंचकूला में हुई हिंसा और आगजनी के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। हनीप्रीत पर आरोप है कि उसने बाबा गुरमीत राम रहीम को बचाने की दुरभिसंधि की थी।
राम रहीम पर डेरे की कई साध्वियों के साथ दुराचार करने, डेरे में रहने वाले साधुओं को नपुंसक बनाने का आरोप है। दो साध्वियों ने किसी तरह डेरे के बाहर चिट्ठी भेजी थी। हिम्मत करके उसने साध्वियों की आपबीती अपने अखबार पूरा सच में छापी थी। इससे गुस्साए राम रहीम ने 2002 में छत्रपति की हत्या करा दी। यही से उसके पराभव की शुरूआत हुई। रील और रियल लाइफ में उसकी छवि अपने भक्तों के बीच भगवान की रही है। उसकी गुनाहों की फेहरिश्त भी काफी लंबी है। डेरा सच्चा सौदा की स्थापना साल 1948 में शाह मस्ताना ने की थी। गुरमीत राम रहीम ने 1990 में डेरे की गद्दी संभाली थी। 90 के दशक से लेकर आज तक डेरा और उसके प्रमुख गुरमीत राम रहीम सिंह विवादों में घेरे में हैं। 1998 में गांव बेगू का एक बच्चा डेरा की जीप के नीचे आ गया। इसके बाद गांववालों का डेरा से विवाद हो गया। इसका समाचार प्रकाशित करने पर अखबारों के नुमाइंदों को धमकाने के भी डेरा सच्चा सौदा पर आरोप लगे। बाद में डेरा सच्चा सौदा और मीडियाकर्मियों के बीच पंचायत हुई जिसमें डेरे की ओर से लिखित में माफी मांगी गई और मामला रफा-दफा हो गया। मई 2002 में डेरा सच्चा सौदा की एक कथित साध्वी ने डेरा प्रमुख पर यौन शोषण के आरोप लगाते हुए प्रधानमंत्री को गुमनाम चिट्ठी भेजी और इसकी एक प्रति पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश को भी भेजी गई। 10 जुलाई, 2002 को डेरा सच्चा सौदा की प्रबंधन समिति के सदस्य कुरुक्षेत्र के रणजीत सिंह की हत्या हो गई। इसकी वजह यह थी कि डेरा सच्चा सौदा के प्रबंधकों को शक था कि रणजीत ने अपनी बहन से गुमनाम चिट्ठी लिखवाई है जो डेरा में साध्वी थी। 24 सितंबर 2002 को हाईकोर्ट ने साध्वी यौन शोषण मामले में गुमनाम पत्र का संज्ञान लेते हुए सीबीआई को जांच के आदेश दिए थे। 24 अक्टूबर, 2002 को सिरसा के सांध्य दैनिक ‘पूरा सच’ के संपादक रामचन्द्र छत्रपति को घर के बाहर गोलियां मारी गईं। इसका आरोप भी डेरा पर लगा। 21 नवंबर 2002 को रामचन्द्र छत्रपति की दिल्ली के अपोलो अस्पताल में मृत्यु हो गई। हाईकोर्ट ने 10 नवंबर, 2003 को सीबीआई को एफआईआर दर्ज कर जांच करने के आदेश दिए। डेरा की याचिका पर दिसंबर 2003 में जांच पर सर्वोच्च न्यायालय ने स्थगनादेश लगा दिया। फिर नवंबर 2004 में दूसरे पक्ष की सुनवाई के बाद जांच जारी रखने के आदेश दिए। इसके बाद डेरा समर्थकों ने चंडीगढ़ में हजारों की संख्या में सीबीआई के अधिकारियों के खिलाफ प्रदर्शन किया। मई 2007 में पंजाब के बठिंडा में डेरा सलावतपुरा में डेरा प्रमुख गुरमीत सिंह की ने गुरु गोविंद सिंह वेषभूषा को धारण किया। इसे लेकर भी उन्हें सिख समाज की नाराजगी झेलनी पड़ी। सिखों पर डेरा प्रेमियों ने हमला बोल दिया। इसके बाद उत्तर भारत में सिखों और डेरा प्रेमियों के बीच कई जगह टकराव हुआ। 7 मई 2007 को सुनाम में प्रदर्शन कर रहे सिखों पर गोली चला दी गई। इस घटना में सिख युवक कोमल सिंह की मौत हो गई। इसके बाद सिख जत्थेबंदियों ने डेरा प्रमुख की गिरफ्तारी को लेकर आंदोलन किया। पंजाब में डेरा प्रमुख के जाने पर पाबंदी लग गई।
18 जून 2007 को बठिंडा की अदालत ने राजेन्द्र सिंह सिद्धू की याचिका पर डेरा प्रमुख के खिलाफ गैर जमानती वॉरंट जारी किए। इसके बाद डेरा प्रेमियों ने पंजाब की बादल सरकार के खिलाफ जमकर प्रदर्शन किए। 16 जुलाई 2007 को सिरसा के गांव घुक्कांवाली में प्रशासन की तरफ से रोक के बावजूद डेरा सच्चा सौदा ने नामचर्चा रखी। सिखों ने डेरा प्रमुख के काफिले को काले झंडे दिखाए। दोनों पक्षों में पथराव हुआ और डेरा प्रमुख को नामचर्चा बीच में छोड़कर जाना पड़ा। 24 जुलाई, 2007 को गांव मल्लेवाला में नामचर्चा में एक डेरा प्रेमी ने फायर कर दिया जिसमें तीन पुलिस कर्मियों समेत आठ लोग घायल हो गए। 31 जुलाई 2007 को सीबीआई ने हत्या मामलों और साध्वी यौन शोषण मामले में जांच पूरी कर न्यायालय में चालान दाखिल कर दिया। सीबीआई ने तीनों मामलों में डेरा प्रमुख गुरमीत सिंह को मुख्य आरोपी बनाया। कोर्ट ने डेरा प्रमुख को 31 अगस्त तक अदालत में पेश होने के आदेश जारी कर दिया।
2010 में डेरा के पूर्व साधु राम कुमार बिश्नोई ने हाईकोर्ट में याचिका दायर करके डेरा के पूर्व मैनेजर फकीर चंद की गुमशुदगी की सीबीआई जांच की मांग की। आरोप था कि डेरा प्रमुख के आदेश पर फकीर चंद की हत्या कर दी गई है। इस मामले में भी उच्च न्यायालय ने सीबीआई जांच के आदेश दिए थे। इसके बाद डेरा प्रेमियों ने हरियाणा, पंजाब और राजस्थान में सरकारी सम्पति को नुकसान पहुंचाया और बसों में आगजनी की गई। हालांकि जांच के दौरान सीबीआई ने सबूत न जुटा पाने पर क्लोजर रिपोर्ट लगा दी। बिश्नोई ने उच्च न्यायालय में क्लोजर रिपोर्ट को चुनौती दी। फतेहाबाद जिले के टोहाना में रहने वाले हंसराज चौहान ने 17 जुलाई 2012 को हाई कोर्ट में याचिका डालकर डेरा सच्चा सौदा प्रमुख पर डेरा के 400 साधुओं को नपुंसक बनाए जाने के आरोप लगाया। 13 जनवरी 2016 को हास्य अभिनेता किकू शारदा को गुरमीत राम रहीम सिंह की नकल उतारने के आरोप में हरियाणा पुलिस ने गिरफ़्तार कर लिया। पापों की निर्जरा नहीं होती। पाप का घड़ा भरता है तो फूटता भी है। कुकर्मी वह अभागा है जिसका विपत्ति में कोई भी साथी नहीं होता। राम रहीम उदास है। पश्चाताप भी कर रहा होगा लेकिन अब पछताए होत क्या जब चिड़िया चुग गई खेत। उदासी का सबब बाबा खुद है। गलत काम किए हैं तो सजा भी भोगनी होगी।
शिवकुमार शर्मा
(लेखक इंडिया न्यूज के डिप्टी एडिटर हैं)

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