Home राजनीति अप्रैल से ब्‍यूरोक्रेट पर एक्‍शन में आएंगे सीएम योगी, होंंगे बड़े फेरबदल

अप्रैल से ब्‍यूरोक्रेट पर एक्‍शन में आएंगे सीएम योगी, होंंगे बड़े फेरबदल

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19 मार्च को मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के 11 दिनों बाद भी योगी आदित्यनाथ अपने सचिवालय की टीम नहीं चुन पाए हैं. इतना ही नहीं लोक संकल्प पत्र को लागू करने के लिए जरूरी अफसरशाही में बदलाव भी अभी तक नहीं हो सका है. लेकिन माना जा रहा है कि 1 अप्रैल के बाद से सीएम योगी ब्यूरोक्रेशी में ताबड़तोड़ बदलाव करने जा रहे हैं.

इनमें डीजीपी से लेकर मुख्यसचिव, प्रमुख सचिव, सचिव, जिलाधिकारी और जिलों के पुलिस कप्तान भी शामिल होंगे.

योगी सरकार के एक वरिष्ठ मंत्री ने बताया कि टीम के गठन में देरी वित्तीय वर्ष के समापन की वजह से है. 31 मार्च के बाद अफसरों की नई टीम गठित हो जाएगी. अफसरों के तबादले भी होंगे लेकिन सरकार चाहती है कि लंबे समय से विभागों का काम देख रहे अधिकारी वित्तीय स्वीकृतियां जारी करेंगे तो ज्यादा बेहतर होगा. नए अधिकारीयों के विभाग में आने पर जल्दबाजी में स्वीकृतियां जारी करने में गलती होने की संभावना है.

प्रदेश सरकार में स्वास्थ्य मंत्री और प्रवक्ता सिद्धार्थनाथ सिंह ने बताया कि जल्द ही काम को लेकर विभागों का प्रेजेंटेशन शुरू होगा. सरकार अफसरों की तैनाती को लेकर कोई जल्दबाजी नहीं करना चाहती.​

आमतौर पर सरकार बदलने के साथ ही अफसरशाही में बदलाव देखने को मिलता है, लेकिन 11 दिनों बाद भी न सचिवालय में नई टीम गठित हुई है और न ही जरुरी ट्रान्सफर हुए हैं. सीएम से लेकर मंत्री तक सिर्फ मौखिक आदेशों से ही काम चला रहे हैं. जिसके बाद अब सत्ता के गलियारों में इसे लेकर तमाम चर्चाएं आम हैं.

पिछले दिनों प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सांसदों और विधायकों को निर्देश दिया कि ट्रांसफर-पोस्टिंग को लेकर दबाव न बनाएं. लिहाजा कई मंत्री पुराने सरकार में तैनात अधिकारीयों के साथ काम करने में हिचकिचा तो रहे हैं लेकिन बोल नहीं पा रहे हैं.

यह भी कहा जा रहा है कि केंद्र और राज्य दोनों जगह बीजेपी की सरकार होने की वजह से पसंदीदा अधिकारी चुनने में कोई दिक्कत नहीं होनी चाहिए, लेकिन पीएमओ के सीधे दखल की वजह से योगी अपने पसंदीदा अधिकारीयों का चुनाव नहीं कर पा रहे हैं.

बता दें सीएम के सचिवालय में प्रमुख सचिव, सचिव से लेकर आधा दर्जन आईएएस तैनात रहते हैं. परम्परा यह भी रही है कि पुराने मुख्यमंत्री सरकार बदलने की स्थिति में अपनी टीम को हटा देते हैं ताकि नए मुख्यमंत्री को अपनी टीम चुनने में कोई दिक्कत न हो.

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